त र ु ीं त ही बबल्ली को उसकी प ूँछ वापस ममल गई, उसने अपना अच्छा स्वभाव भी वापस पाया और उसकी आूँखों में सपन झझलममलाने लगे।
इसीमलए, आज भी हमारे मलए नीले, ग ल ाबी और सफेद रीं गवाली तततली का मूँडराना उतना ही आनींददायक है , जजतना कक छत पर बैठी दो बबजल्लयों का चींद्रमा के बारे में सोचते हुए अपनी प ूँछों से हृदय का आकार बनाना आनींददायक है ।